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राष्ट्रीय

ग्रह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार: UP में हुई सबसे ज्यादा सांप्रदायिक हिंसा

  • August 9, 2017
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ग्रह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार: UP में हुई सबसे ज्यादा सांप्रदायिक हिंसा

केंद्रीय ग्रह मत्रांलय ने देशभर में हुईं सांप्रदायिक हिंसा के आंकड़े जारी किए हैं। ये आंकड़े साल 2017 के हैं। सरकारों द्वारा आपसी भाईचारे और विकास के दावों के बीच भारत में सांप्रदायिक हिंसा के आंकड़ों में बीते सालों की तुलना में खासी कमी देखने को मिली है। गौरतलब है कि जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इस साल देशभर में अबतक 296 सांप्रदायिक घटनाओं के मामले में सामने आए हैं। इन घटनाओं में 44 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि 892 लोग घायल हुए। आकंड़ों के अनुसार पिछले दो सालों में रिकॉर्ड लोगों की मौत हुई। साल 2016 में 703 जबकि साल 2015 में 751 हिंसक घटनाएं हुईं। जिनमें क्रमश: 86 और 97 लोगों की मौत हुई। इस अवधि में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 60 हिंसक घटनाएं हुई। जिसके बाद कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है। वहीं उत्तर प्रदेश में हुई 60 सांप्रदायिक घटनाओं में 16 लोगों की मौत हुई और 151 लोग घायल हुए। वहीं कर्नाटक में 30 घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई जबकि 93 लोग घायल हुए। दूसरी तरफ हाल में पश्चिम बंगाल के बशीरघाट में 26 हिंसक घटनाएं हुई जिनमें तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। जबकि बीते साल राज्य में महज 32 हिंसक घटनाएं हुई और 4 चार लोगों की जान गई।

रिपोर्ट के अनुसार सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में लगातार तीसरा साल है जब उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सबसे ऊपर हैं। पिछले साल उत्तर प्रदेश में 162 और कर्नाटक में 101 मामले दर्ज हुए थे। जबकि साल 2015 में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं का आंकड़ा उत्तर प्रदेश में 155, जबकि कर्नाटक में 105 था। 2015 में महाराष्ट्र में भी सांप्रदायिक हिंसा के 105 मामले सामने आए थे। हालांकि, 2014 में शीर्ष तीन राज्यों में उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल थे। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार इस साल मई तक सांप्रदायिक टकराव के मामलों की संख्या मध्य प्रदेश में 29, राजस्थान में 27, पश्चिम बंगाल में 26 और बिहार में 23 रही है। इसके अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में 20-20 मामले दर्ज किए गए हैं। 2014 से लेकर मई 2017 तक के आंकड़ों को मिला दें तो देश में सांप्रदायिक टकराव के मामलों की संख्या 2,394 हो जाती है। इनमें कुल 322 लोग मारे गए, जबकि 15,498 लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इनमें मौतों के लिहाज से 2015 सबसे खतरनाक साल था। इस साल कुल 97 लोग मारे गए थे।