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April 23, 2024
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जब तुम्हारे (मुस्लिम समाज) ज़िक्र से बड़े बड़े नेता घबराएंगे, तुम्हारी दावतों में तुम्हारा ही वोट बटोरने वाले आने से बिदकेंगे, तो..

  • April 20, 2023
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जब तुम्हारे (मुस्लिम समाज) ज़िक्र से बड़े बड़े नेता घबराएंगे, तुम्हारी दावतों में तुम्हारा ही वोट बटोरने वाले आने से बिदकेंगे, तो..

नई दिल्ली | कांग्रेस के पूर्व सांसद राहुल गाँधी जब जामा मस्जिद, पुरानी दिल्ली इलाके में रमजान के पवित्र माह में देर शाम लोगों के बीच पहुंचे तो देशभर में उनके फोटो वायरल हो रहे हैं | राहुल गाँधी के इस दौरे पर सबसे ज्यादा वायरल हफीज किदवई का एक फेसबुक पोस्ट हो रहा है | आप भी पढ़िए उन्होंने क्या लिखा-

राहुल यह क्या करते हो तुम यार । क्यों करते हो । क्यों इस मायूसी भरे दिनों में एक उम्मीद बनकर सामने आकर खड़े हो जाते हो । पता है, कल जबसे दिल्ली की घनी बाज़ार में चाट और शरबत के साथ लोगों के बीच तुम्हे देखा,तो लगा,यही तो चाहिए था कि कोई आए और कहे,ज़िन्दगी अभी इतनी भी मायूस नही हुई है । इधर जो दिन गुज़रे हैं, बहुत अज़ीयत भरे रहे हैं, हमारे भी और राहुल के भी मगर राहुल की ताज़गी देख लगा कि मुश्किलों से ऐसे ही लड़ना चाहिए, अपने को ज़िन्दा रखते हुए, जूझना चाहिए ।

राहुल का कल तंग गली में खड़े होकर शरबत पीना, सिर्फ शरबत पीना नही था, बल्कि एक सन्देश था कि तुम्हारे मायूसी से उमस भरे दिनों को बांटने के लिए कोई साथ खड़ा है । तरबूज़ की फांक ही सिर्फ़ राहुल के हाथ में नही है, बल्कि एक सन्देश है कि जब तुम्हे अलग थलग कर दिया जाएगा, तुम्हारे ज़िक्र से बड़े बड़े नेता घबराएंगे, तुम्हारी दावतों में तुम्हारा ही वोट बटोरने वाले आने से बिदकेंगे, तो कोई है, जो इन सबसे अलग, तुम्हारे बीच आकर खड़ा हो जाएगा । वह राहुल है, ज़ख्म के बीच ऐसा मरहम , जो दर्द को सोख लेता है ।
यह तस्वीरें किसी को कैसे दिखेंगी, पता नही, लोगों का बर्ताव क्या होगा, पता नही मगर मेरे दिल में एक ताज़गी भरती हैं । हमें उम्मीद दिलाती हैं कि यार ,खड़े रहो, पूरी ऊर्जा के साथ, ताकि दूसरे भी उम्मीद रख सकें सुबह के आने की…राहुल ने क्या नही झेला मगर खड़ा है, उनके बीच, जिनकी मायूसी से दूसरे खुश होते हैं । राहुल का बाज़ार में निकल जाना एक संकेत है कि न वह डरता है और “न डरने” का ही सन्देश देता है ।

राहुल की सादगी,बेबाकी,सच्चाई अपना असर ज़रूर डालेगी । झूठ और प्रपंच में डूबे दिल,एक दिन समझेंगे की सच क्या होता है । मुझे मेरे राहुल पर यक़ीन है कि वह ही उम्मीद है, जो बर्बादियों के इस मौसम के बाद,बहार लाएगा,मगर तब तक हमें खुद को ज़िन्दा और ताज़ा रखना है, बिल्कुल वैसे,जैसे मेरा राहुल है।

  • लेखक हफ़ीज़ क़िदवई का यह पोस्ट वायरल हो रहा है |