लहू रहा है अब पुकार, आतंक को दो जड़ से उखाड़ !

अब धैर्य धरा न जाएगा
बहुत हुआ अब संयम
अब रण ही हो जाएगा
अब धैर्य धरा न जाएगा
दहक रही हैं ज्वाला तन में
क्रोधाग्नि दावानल आएगा
इन दरिंदों को सीधे अब
रण में मारा जाएगा
वीर जवानों का लहू का
अब बदला लिया जाएगा
ये नपुंसक पाकिस्तानी
अब इनको न बख्शा जाएगा
अमर शहीदों को अब
रण ही सुकून पहुचायेगा
बहुत हुआ हिंसा का खेल
अब बदला लिया जाएगा
अब धैर्य धरा न जाएगा
लहू रहा है अब पुकार
आतंक को दो जड़ से उखाड़
अब धैर्य धरा न जाएगा
आश्वासन नही अब रण होगा
सीधे अब ये प्रण होगा
एक दरिंदा बच न पाए
अब सीधे उनका सर होगा
अब धैर्य धरा न जाएगा
सुन लो ओ पाकिस्तान
अब लहू तुम्हारा होगा
अब धैर्य धरा न जाएगा ||
-लेखिका आकांक्षा द्विवेदी यूपी के बिंदकी फतेहपुर से हैं |
-गोरखपुर से ब्यूरोचीफ राशिद अकेला द्वारा भेजी गई ।