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पढ़िए IAS टॉपर नंदिनी की ये कहानी-

  • January 21, 2024
  • 1 min read
पढ़िए IAS टॉपर नंदिनी की ये कहानी-

आईएएस नंदिनी-
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की फील्ड में साल 2016 कर्नाटक राज्य के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि कोलार जिले के केम्बोडी गांव की मूल निवासी नंदिनी के.आर. ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अपने चौथे प्रयास में प्रतिष्ठित ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर सबको चौंका दिया. आईआरएस प्रोबेशनरी ऑफिसर नंदिनी यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करके कर्नाटक की पहली महिला यूपीएससी टॉपर बनीं और उन्होंने एक इतिहास रच दिया.

एक साधारण बैकग्राउंड से आने वाली नंदिनी के पिता, रमेश, एक सहायक स्कूल मास्टर के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां, विमला ने टीचिंग करियर छोड़कर अपने बच्चों की शिक्षा का समर्थन करने के लिए खुद को समर्पित कर दिया. बेंगलुरु के एमएस रामैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली नंदिनी ने अपनी स्कूली शिक्षा कन्नड़ माध्यम से की और बाद में तीन साल तक राज्य लोक निर्माण विभाग में सहायक इंजीनियर के रूप में काम किया. शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और पढ़ने और वॉलीबॉल खेलने के प्रति उनके प्यार ने उनके चरित्र को आकार दिया.

नंदिनी की सफलता की यात्रा चुनौतियों से भरी थी. साल 2013 में अपने शुरुआती प्रयास में, उचित मार्गदर्शन और तैयारी के अभाव में, वह प्रीलिम्स परीक्षा तक पास करने में असफल रही. हालांकि, निडर होकर, उन्होंने एक अच्छी स्ट्रेटजी की आवश्यकता को पहचाना और उसे तैयार कर साल 2014 में अपने दूसरे प्रयास में, एक सहायक इंजीनियर के रूप में काम करते हुए, उन्होंने कन्नड़ साहित्य को अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में चुना. यह ऑप्शन उनके बचपन के शौक से प्रेरित था. इस बार उन्होंने परीक्षा पास कर आईआरएस ऑफिसर की पोस्ट हासिल कर ली, लेकिन उनके अंक प्रतिष्ठित आईएएस ऑफिसर बनने के लिए पर्याप्त नहीं थे.

अपनी गलतियों से सीखते हुए, नंदिनी ने 2015 में अपने तीसरे प्रयास में अपनी तैयारी तेज कर दी, लेकिन डेंगू के कारण उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा, जिसके कारण वह यूपीएससी मेन्स परीक्षा से चूक गईं. लेकिन, उन्होंने पढ़ाई और खेल दोनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए डेली टाइम टेबल के साथ अपने चौथे प्रयास के लिए तैयारी की. इस बार वह तैयारी के लिए दिल्ली आ गईं, जहां उन्होंने अपनी यूपीएससी की तैयारी को आगे बढ़ाने के लिए एक कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया. आईएएस पद की तलाश में उन्हें और भी अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन नंदिनी की दृढ़ता और प्रतिबद्धता अंततः सफल रही. क्योंकि उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा 2016 की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 के साथ टॉप रैंक हासिल की.

यूपीएससी 2016 के परिणाम घोषित होने के समय नंदिनी फरीदाबाद में आईआरएस अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं. परिणाम घोषित होने से एक सप्ताह पहले, उसके दोस्त उन्हें यूपीएससी टॉपर करकह चिढ़ाते थे और उनके रिजल्ट के बारे में मजाक बनाते थे क्योंकि वह कई बार यूपीएससी के अटेम्प्ट दे चुकीं थी. हालांकि, इस बार वह ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर सच में यूपीएससी टॉपर बन गईं और उन्होंने अपने सभी दोस्तों को मुंह तोड़ जवाब दिया.